स्त्री का प्रेमपूर्ण होना

स्त्री का स्वभाव ही प्रेमपूर्ण होता हैं जब किसी कन्या का जन्म होता है तब वह पूर्ण ही पैदा होती हैं | पुरुष पूर्ण पैदा नहीं होता हैं क्यूंकि स्त्री गर्भ के अंडाशय लेकर पैदा होती हैं स्त्री ही एक पुरुष को बनाती है तथा उसे उचित मार्ग दिखा सकती है | स्त्री स्वभावतः शर्मीली होती हैं तथा आकर्षक या मोहित करने वाली होती हैं स्त्री कभी भी प्रेम के प्रति पहले आगे नहीं होती हैं पहले पुरुष को ही बात करनी पड़ती हैं | स्त्री ज़ब दुखी होती हैं तब उसे किसी हमदर्द की कम ही आवश्यकता होती हैं क्यूंकि स्त्री कोमल ह्रदय की होती हैं तथा रोकर अपना दुख पिघला लेती हैं परन्तु पुरुष रोने मे सक्षम नहीं होते तथा कठोर एवं आक्रमक प्रकृति के होते है |

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इस संसार में व्यक्ति विशेष की अलग अपनी-अपनी सफलता है कोई प्रेम में सफल होना चाहता है , कोई बहुत सारा रुपया कमाना चाहता है इसी प्रकार सब के जीवन में सफसलता के अलग अलग मायने होते है| सफलता एक कला है , आत्मसमर्पण है खुद का खुद के लिए | जिस मंज़िल को हम पाना चाहते है उसकी राह में लय होना पड़ता है निरंतर उसके लिए प्रयास करना होता है | कभी आप किसी सफल इंसान से मिलिए जिसने जीवन में सफलता प्राप्त कर ली हो वो आपको बतायंगे उन्होंने कैसी परिस्थितियों का सामना किया तब मंज़िल तक पहुंचे परन्तु उनकी उनके काम के प्रति तत्परता तथा समर्पण ही उनके सफल होने का कारण बनता है | खराब परिस्तिथिया सिर्फ हमे हमारी राह में आज़माती है और भी ज्यादा सफल होने के लिए हमे मज़बूत करती है | सकारत्मकता धैर्य एवं तत्परता ही हमारी सफलता के लिए साथी है जो हमे सफल होने का अवसर प्रदान करती है |