तीसरा नेत्र क्या है ?

यहां हम आपको कुछ रोचक जानकारी प्रदान कर रहे है तीसरी आँख (the third eye) जिसका जाग्रत होना अतिआवशयक है संसार के सभी प्राणियों में सिर्फ मानव शरीर में यह क्रिया होती है | वर्तमान में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान द्वारा पूर्व योगविज्ञान द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत नाड़ी द्वारा मस्तिष्क के दोनों भागो का प्रयोग को अत्यंत महत्त्व दिया जा रहा है |
योगविज्ञान में नाड़ी को मानवशरीर में प्रवाहित होने वाली भौतिक ,मानसिक व् आध्यात्मिक ऊर्जा का माध्यम बताया गया है| हमारे शरीर में 72 हजार से भी अधिक नाड़ियाँ स्थित है ,किन्तु इन सभी नाड़ियो में इडा ,पिंगला व सुषुम्णा नाड़ी सर्वाधिक महत्वपूर्ण है | सामान्य अवस्था में केवल इडा अथवा पिंगला नाडिया ही सक्रीय रहती है , सुषुम्णा नाड़ी सामान्यतया निष्क्रिय ही रहती है |

श्वसन क्रिया के दौरान शरीर में प्रविष्ट होने वाली प्राणवायु या तो इडा नाडी के मध्य से अथवा पिंगला नाडी के मध्य से यात्रा करती है| इडा(चन्द्रस्वर )नाडी का आरम्भ बांए नासाछिद्र से होता है ,जो दाँये नासाछिद्र से मिलता है |इस प्रकार प्रवाहित प्राणवायु लघुमस्तिष्क(cerebellum)व मेड्यूला ओब्लोंगेटा (medulla oblongata)में प्रविष्ट होती हुई ,सुषुम्णा काण्ड के बाँए तरफ यात्रा करते हुए सुषुम्णा काण्ड के अंत में यात्रा समाप्त करती है | इसी प्रकार दूसरी ओर पिंगला (सूर्यस्वर )नाडी द्वारा भी प्राणवायु के संचरण का कार्य सम्पादित होता है

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नासिका के आतंरिक कोषो में स्थित प्रत्येक नासिका छिद्र में कार्टिलेज नामक ऊत्तक )tissue )से बने द्वार होते है ,जिनका पूर्ण नियंत्रण आज्ञाचक्र के द्वारा सम्पादित होता है | श्वसन की अवस्था में जब एक छिद्र खुलता है तो उसी समय दूसरे नासिका छिद्र से श्वास का प्रवेश पूर्णतया बंद हो जाता है | नासिका के ऊपरी भाग (छत )पर,जहा दोनों नासाछिद्र संयुक्त होते है एवं जहा इडा एवं पिंगला नाडी का उद्गम स्थान होता है ,वहा शरीर का प्रमुख जीवनीय बिंदु (vital spot )होता है | यही पर इडा (parasympathetic परानुकम्पी )एवं पिंगला (sympathetic अनुकम्पी) संयुक्त होकर एक प्लेक्सस (plexus )बनाती है ,जिसे आज्ञाचक्र कहते है |
हमारे जीवन साधना के शास्त्रों में इसे तीसरे नेत्र (the third eye )की संज्ञा दी गयी है जो साधक इस बिंदु को सक्रीय कर लेता है वह अद्वितीय शक्ति को धारण कर लेता है