क्रोध का मनोविज्ञान

‘क्रोध क्या है | क्रोध हमारे चित्त की एक उलझन भरी दशा है जिसमे मनुष्य बिना होशपूर्ण हुए ही गलत आचरण कर देता है तथा क्रोध के शांत होने पर पछतावा करता है की इतना नुक्सान होगया मेरी अन्तर्दशा का , मेरे द्वारा क्यों किया गया क्रोध , अशांत मन में ही क्रोध उतपन्न होता है यह बात जान लेना बहुत आवश्यक है | शांत चित्त वाला मनुष्य कभी क्रोध का अपने भीतर जन्म नहीं होने देता | नकारात्मकता ही क्रोध की जननी है इसलिए नकारत्मक विचारो एवं लोगो से दूरी बनाये रखना चाहिए क्यूंकि व्यर्थ विवाद करना उचित नहीं होता है |

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क्रोध करना आसान नहीं होता, क्रोध करने के लिए उसकी तैयारी आवश्यक होती है क्यूंकि जितना क्रोध हम सामने वाले इंसान पर करना चाहते है उतनी ही जटिलता हमारे भीतर उतपन्न करनी होती है हमारी अंतरात्मा को उतना ही दुखाना पड़ता है जितना सामने वाला हमारे क्रोध से दुःख पाता है | जितना दुखी हम सामने खड़े इंसान को करना चाहते है उतना ही द्वेष घृणा हमारे अंदर भी जन्म लेती है इसलिए क्रोध करना उचित नहीं कहा गया है क्यूंकि इससे हमारी क्षति है और ऐसे क्रोध करने से क्या फायदा है जिससे हम खुद नुकसान में रहे |
कई बार हम देखते है कोई व्यक्ति अपने आपे से बाहर हो जाता है और जो घटना वह नहीं करना चाहता वो भी कर देता है जिससे उसे बाद में दुःख और पछतावा होने लगता है | क्रोध तुमसे किसीने करने को नहीं कहा था परन्तु क्रोध किया गया, क्रोध एक अकस्मात् घटना की तरह है हमारे चित्त की मनोदशा का प्रभाव ही क्रोध का कारण बनता है | सकारात्मक विचारो वाला इंसान कभी क्रोध नहीं करता क्यूंकि उसकी मनोदशा नकारात्मक विचार वाले इंसान से सुलभ एवं शुद्ध है |

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हमने वो कहावत सुनी है की दुसरो पर कीचड़ उछालने के लिए पहले खुद के हाथ गंदे करने पड़ते है , इसी प्रकार दूसरे पर क्रोध करने के लिए हमे खुद जटिल एवं क्रोधी होना पड़ता है क्रोध किसी भी समस्या का हल नहीं हो सकता परन्तु समस्या को बढ़ाने में अवश्य मदद करता है | शांत चित्त वाला इंसान हमेशा अच्छे आचरण का धनी होता है तथा किसी भी कार्य में बाधा आने पर संयम से काम लेता है , परन्तु क्रोध करने वाला इंसान बनते काम बिगाड़ सकता है | क्रोध करना किसी किसी की बहुत बुरी आदत साबित होती है जिससे उससे कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है | शांत विचारो को अपनाये एवं सरल तथा सफल जीवन की कामना करे |
क्यूंकि इस छोटी सी जिंदगी में बेशुमार दौलत कमाई जा सकती है परन्तु दौलत से मन की शांति कभी नहीं कमाई जा सकती , शांति के लिए हमे ही प्रयास करना पड़ता है |