गृह युद्ध (अखंडभारत का युद्ध)उपरांत

महाभारत काल के महायुद्ध के उपरांत जब अखंड भारत का विनाश हुआ था ,जब भारत बहुत विशाल था जम्बुमहाद्वीप (एशिया महाद्वीप) का सबसे बड़ा देश था। तथा महाभारत के युद्ध में अखडं भारत के सभी राजाओ ने भाग लिया था तथा उनकी सेनाओं के साथ पांडवो और कौंरवों के युद्ध में धर्म केलिए लडे थे। परन्तु ,युद्ध समाप्त होने के पश्चात सिर्फ पांडव बचे थे , विनाशकाय युद्ध के पश्चात् कोई जीवित नहीं बचा सिर्फ उनकी पत्निया एवं लाचार बच्चे बहु बेटियाँ बची थी तथा उनका क्या हुआ होगा जब न खाने के लिए अन्न था ना कुछ व्यवस्था ,इस युद्ध में लगभग तीन अरब सैनिक एवं राजा तथा प्रजा समाप्त हो गयी थी।
ए अपने विराट स्वरुप का दर्शन कराया था।

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महाभारत विनाश स्थिति

युद्ध के बाद मारे गए सेनिको एवं राजाओ की बेवाओँ ,बहु-बेटियों,के साथ क्या हुआ उसकी कल्पना करना भी बहुत महावहि है ,विनाश के बाद उनकी स्थिति भुखमरी से लाचार पीड़ित लोग ,भूख -प्यास से मरते एवं रोग से ग्रसित एवं पीड़ित परिवारों का क्या हुआ होगा कोई नहीं जानता परन्तु इस गंभीर स्थिति से बाहर कैसे आये उन्होंने सब कैसे स्थिति को संभाला उनकी स्थिति को उन्नत होने में करीब
४०० साल का समय लगा। जब तक अखंडभारत के टुकड़े होचुके थे। म्यांमार , श्रीलंका ,अफगानिस्तान आदि ऐसे १४ हिस्सों में बटा भारत अब अखंड भारत नहीं रहा था ,ततपश्चात हिस्सों में बँटने के साथ ही साथ धर्म भी अलग अलग हो गए।

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महाभारत युद्ध क्यों आवश्यक था

महाभारत काल का युद्ध वैसे तोह पांडवो एवं कौरवो के पारिवारिक मतभेद हेतु हुआ था। परन्तु अखण्डभारत काल में धर्म को सबसे ऊँचा मानते थे तथा धर्म का उलंघन असहनीय माना जाता था ,धर्म के सबसे बड़े विद्वान धर्मराज युधिष्ठिर हमेशा धर्म के अनुसार चलते थे। जब पांडव और कौरव युद्ध भूमि पर एकत्रित हुए थे ,तब युधिष्ठिर जी ने अपने भाइयों(कौरवो) के साथ युद्ध करना उचित नहीं समझा तथा धर्म की बात थी तोह इस महायुद्ध में धर्म-अधर्म के इस युद्ध में अखंड भारत के समस्त राजाओ ने अपनी अपनी सेना के साथ इस युद्ध में पांडवो और कौरवो का साथ दिया था। अर्जुन भी इस युद्ध से सहमत नहीं थे क्यूंकि अपने ही भाइयों के विरुद्ध सश्त्र उठाना उन्हें ठीक आभास नहीं हुआ ,तब श्री कृष्ण जी ने अर्जुन को समझाते हुए वास्तविक धर्म का ज्ञान कराया कि ,यह जो तुम्हारे विरुद्ध खड़े तुम्हारे भाई
जरूर है परन्तु ये धर्म से विचलित हो रहे है तथा धर्म हेतु इनसे युद्ध करना अधर्म नहीं है यह तुम्हारा क्षत्रिय धर्म है। धर्म ही श्रेष्ठ है ,अर्जुन को धर्म एवं ब्रह्मज्ञान का मार्गदर्शन कराते हु