मनुष्य को भगवान की आवश्यकता

इंसान अपने जीवन मे हर तरह की इच्छा करता हैं तथा उनके पूर्ण होने की कामनाये करता हैं परन्तु कभी आपने देखा है कोई जानवर, पेड़, या किसी अन्य प्राणियों को भगवान का कोई अस्तित्व नहीं मालूम | मनुष्य के अलावा कोई भी प्राणी किसी पर निर्भर नहीं है तथा जीवन से लेकर मृत्यु तक स्वयं पर निर्भर है परन्तु मनुष्य अपनी अच्छी बुरी हर इच्छा की पूर्ति के लिए भगवान पर विश्वास करता है भगवान के आगे हाथ फैलाता है तथा अपनी आने वाली पीढ़ी को भी भगवान पर आस्था रखना सिखाता है इसीलिए सभी मनुष्यों को मंदिरो, मस्जिदों, चर्च मे कुछ न कुछ मांगते देखा जाता है | इंसानों ने भगवान को बाँट लिया सबके अलग धर्म अलग भगवान होगये है तथा भगवान के ही नाम पर आपस मे वेर करते है |

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ऐसे काम का कोई सार नहीं निकलता फिर भी अन्धविश्वास इतना बढ़ गया है की किसी भी इंसान के सामने हम भगवान को कुछ बोल नहीं सकते | भगवान की निंदा करने वाले को लोग पागल कहने लग जाते है या मार देते है | जीवन जीने के लिए जीवन को समझने की आवश्यकता है किसी भगवान की नहीं तथा यह बात मनुष्यों से ज्यादा पशुओ को अच्छे से मालूम है क्योंकि जीवन के प्रति सजग है उन्हें अन्धविश्वास का कोई पता नहीं है | ईश्वर ने सबके लिए सामान व्यवस्था की है | भगवान के प्रति इतनी गंभीरता दिखाने के पीछे लोगो का भय ही है जो उन्हें वहां तक खिंच ले जाता है | इच्छा की पूर्ति न होने का भय ही इंसान को भगवान की जरुरत महसूस कराता हैं इसीलिए इंसानों को भगवान की आवश्यकता हैं |