वर्तमान धर्म की दशा

बचपन से लेकर आजतक हमने कई धर्मो के बारे में सुना है अर्थात जाना है तथा भारत देश में कई प्रकार के धर्मो को जगह मिली है मुख्यतः चार धर्म हमे पता है मुस्लिम ,हिन्दू , सिक्किम और ईसाई धर्म | सभी अपने अपने धर्मो के प्रति कृतज्ञ होते है परन्तु हमारा ही धर्म सबसे बड़ा है ऐसा कहना कही न कही गलत है क्यूंकि ईश्वर सभी प्राणियों के लिए एक समान है ईश्वर का किसी प्राणी के लिए कोई भेदभाव नहीं है सब के लिए उसका एक समान अस्तित्व है वो किसी के लिए बड़ा या छोटा नहीं हो सकता , सभी प्राणियों में उसका वास है |

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धर्म तोह इंसानो की सुगठित रचना है या हम मान सकते है जीवन जीने की एक शैली है धर्म के आधार पर किसी को गलत या सही बताना बिलकुल भी उचित नहीं है सब अपने धर्म के हिसाब से अपना जीवन व्यतीत करते है इसमें कुछ गलत भी नहीं है | परन्तु वर्तमान में धर्म को तोला जाता है यह कृत्य निंदनीय है | अगर विचार किया जाए तो जीवन जीने के लिए किसी धर्म की कोई आवश्यकता नहीं है , प्राणी अगर स्वयं को जानकर एक दूसरे को जीवन जीने में मदद करे तोह इस संसार में किसी भगवान की आवश्यकता नहीं है संसार में सब एक सामान है | बड़ा छोटा , अमीर गरीब , उच जाती निच जाती इस प्रकार की तुलना व्यर्थ है | वर्तमान में तथा पहले भी इन भेदभावों के कारण बहुत से प्राणी समुदाय को क्षति पहुंची है , वर्तमान दौर की हम बात करे तो धर्मो का प्रचार अवश्य होता रहता है परन्तु सिर्फ अन्धविश्वास की नींव पर ‘ कोई भी वास्तविक धर्म से परिचित नहीं है सभी कहे सुनाये ज्ञान को फैलाते है जिससे कोई लाभ नहीं है इसलिए हमे इन धर्मो की आड़ नहीं लेकर मनुष्यता को नया जन्म देना चाहिए |