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जीवन एक छोटी सी प्यास

By health-careNo Comments

जीवन एक छोटी सी प्यास हैं जिसकी कोई सीमा नहीं हैं परन्तु वह फिर भी एक छोटी सी प्यास हैं इस बात को समझें |
हमें हमारे जीवन का भविष्य नहीं मालूम परन्तु हम भविष्य के लिए कई विचार करते रहते हैं सबकुछ हासिल करने की एक प्यास ही हमारे भीतर आकांक्षाए पैदा करती रहती हैं तथा उन आकांक्षाओ की पूर्ति न होने पर या जैसा हमने विचार किया उसके अनुसार न होने पर हम दुख का अनुभव करते हैं और हमारी प्यास संतुष्ट नहीं होती हैं | संतुष्ट व्यक्ति के भीतर की प्यास शांत रहती है तथा जीवन सरलता से जीता है जिस व्यक्ति का मन उसके विचारों के अधीन नहीं है वही व्यक्ति जीवन को सरल जीता है | हम हमारे जीवन को गहराई से देखे तथा अपनी इच्छाओ के कारण ही हम बंधे हुए हैं तथा स्वयं को स्वतंत्र नहीं देख पाते.. निरंतर कुछ पाने के पीछे व्यक्ति कई विवादों मे उलझता हैं घर परिवार मे शांति नहीं रह पाती हैं | मन की कोई सीमा नहीं है इसिलए इच्छाओ की भी कोई सीमा नहीं है |

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हम जिस चीज को हासिल करलेते हैं वो चीज उसी क्षण व्यर्थ हो जाती है तथा मन एक नई प्यास को जन्म देता है इसी क्रम से जीवन मे हमेशा एक प्यास रहती ही है जिसके लिए व्यक्ति निरंतर प्रयत्नशील रहता है एवं जीवन के आखिर समय मे पछतावे के अलावा कुछ नहीं पाता | अधिक धन की इच्छा रखने वाला व्यक्ति भी सिर्फ धन की खोज मे ही जीवन बिता देता है तथा जीवन के अमूल्य अनुभव करने से वंचित रह जाता हैं | जीवन की दशा दयनीय लगती हैं आखिर समय क्यूंकि कुछ भी हमारे लिए यहाँ हमेशा नहीं हैं सबकुछ निरंतर परिवर्तन होता हैं जीवन के इस सत्य को पहले खोज लेने की बहुत आवश्यकता हैं |

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आत्महत्या विकल्प हैं

By DepressionNo Comments

वर्तमान मे रोज अखबारों मे, टीवी मे, सोशल मिडिया पर कई खबरों को हम सुनते है की किसी लड़के ने आत्महत्या करली किसी लड़की ने आत्महत्या करली ! लोगो ने आत्महत्या को एक विकल्प बना लिया हैं जीवन मे ज्यादा दुख हुआ ज्यादा पछतावा हुआ तोह आत्महत्या का विकल्प हैं मर जाते हैं कोई गलती करके इतना पछतावा महसूस करता है की आत्महत्या कर लेता हैं | परन्तु आत्महत्या कोई विकल्प नहीं हैं बल्कि जीवन से पलायन करना हैं स्वयं से हिंसा करना उचित नहीं है | जीवन मे जो भी दुख हैं परेशानिया है कही नहीं कही उनके हम ही ज़िम्मेदार हैं तथा कभी कभी दुसरो की भी वजह से हम खुद को तकलीफ देने लगते हैं | हमारे जीवन मे आने वाले सभी दुख सुख हमारे कर्मो का ही परिणाम होता हैं एक व्यक्ति आत्महत्या ज़ब करता हैं ज़ब वो अपने स्वयं के कर्मो से ही परेशानी उठाता हैं तथा खुद से घृणा करने लग जाता है

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परन्तु आत्महत्या इसका कोई विकल्प नहीं हैं मृत्यु के बाद कुछ नहीं होगा तुम फिर किसी नये जीवन को प्राप्त हो जाओगे और एक नये दुख मे जियोगे जो इस दुख से भी अधिक कष्टदेय होगा | संसार मे जो भी आप सोचते है तथा जिस दिशा मे आपके विचार प्रबल है आप उसी दिशा मे जीवन को आगे बढ़ते हुए देखते हैं | जीवन को सकारात्मक विचारों से जीना आवश्यक हैं, सकारात्मकता ही कई परेशानियों का सामना करने मे मददगार होती है | कर्मो से कोई भाग नहीं सकता क्यूंकि तुम खुद से कभी भाग नहीं सकते तो तुम्हारे कर्मो से कैसे छुटकारा पा सकते हो | आत्महत्या हमारी आत्मा की हत्या हैं तथा हम भी आत्मा हैं खुद को दुखी करना ही आत्महत्या हैं | जीवन मे सकारात्मक भाव ही जीवन की सभी कर्मो से हमें छुटकारा दिला सकता हैं |

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स्त्री का प्रेमपूर्ण होना

By SpiritualityNo Comments

स्त्री का स्वभाव ही प्रेमपूर्ण होता हैं जब किसी कन्या का जन्म होता है तब वह पूर्ण ही पैदा होती हैं | पुरुष पूर्ण पैदा नहीं होता हैं क्यूंकि स्त्री गर्भ के अंडाशय लेकर पैदा होती हैं स्त्री ही एक पुरुष को बनाती है तथा उसे उचित मार्ग दिखा सकती है | स्त्री स्वभावतः शर्मीली होती हैं तथा आकर्षक या मोहित करने वाली होती हैं स्त्री कभी भी प्रेम के प्रति पहले आगे नहीं होती हैं पहले पुरुष को ही बात करनी पड़ती हैं | स्त्री ज़ब दुखी होती हैं तब उसे किसी हमदर्द की कम ही आवश्यकता होती हैं क्यूंकि स्त्री कोमल ह्रदय की होती हैं तथा रोकर अपना दुख पिघला लेती हैं परन्तु पुरुष रोने मे सक्षम नहीं होते तथा कठोर एवं आक्रमक प्रकृति के होते है |

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इस संसार में व्यक्ति विशेष की अलग अपनी-अपनी सफलता है कोई प्रेम में सफल होना चाहता है , कोई बहुत सारा रुपया कमाना चाहता है इसी प्रकार सब के जीवन में सफसलता के अलग अलग मायने होते है| सफलता एक कला है , आत्मसमर्पण है खुद का खुद के लिए | जिस मंज़िल को हम पाना चाहते है उसकी राह में लय होना पड़ता है निरंतर उसके लिए प्रयास करना होता है | कभी आप किसी सफल इंसान से मिलिए जिसने जीवन में सफलता प्राप्त कर ली हो वो आपको बतायंगे उन्होंने कैसी परिस्थितियों का सामना किया तब मंज़िल तक पहुंचे परन्तु उनकी उनके काम के प्रति तत्परता तथा समर्पण ही उनके सफल होने का कारण बनता है | खराब परिस्तिथिया सिर्फ हमे हमारी राह में आज़माती है और भी ज्यादा सफल होने के लिए हमे मज़बूत करती है | सकारत्मकता धैर्य एवं तत्परता ही हमारी सफलता के लिए साथी है जो हमे सफल होने का अवसर प्रदान करती है |

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सफलता एक कला है

By SpiritualityNo Comments

कोई भी व्यक्ति हो हर कोई अपने जीवन में सफल होना चाहता है , सफलता की हर ऊंचाई को पाना चाहता है परन्तु उसके लिए उसे कई मुसीबतो से लड़ना पड़ता है कैसी भी परिस्तिथि हो गुज़रना पड़ता है बहुत धैर्य एवं विवेक से काम करना पड़ता है | जीवन से लड़ना सफलता के लिए हर किसी के बस की बात नहीं होती है इसलिए ऐसे व्यक्ति सफलता को छोड़कर लोट जाते है अर्थात जल्दी थक जाते है, सफलता पाने का ख्याल छोड़ देते है | ऊपर एक वाक्य है ‘जीवन से लड़ना ‘ | जीवन से लड़ना कोई सही बात नहीं है सफल होने के लिए विवेक तथा धैर्य आवश्यक है जीवन से लड़कर कोई सफल नहीं हो सकता ,जीवन लड़ने के लिए नहीं है , प्रेमपूर्ण होने के लिए है |

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इस संसार में व्यक्ति विशेष की अलग अपनी-अपनी सफलता है कोई प्रेम में सफल होना चाहता है , कोई बहुत सारा रुपया कमाना चाहता है इसी प्रकार सब के जीवन में सफसलता के अलग अलग मायने होते है| सफलता एक कला है , आत्मसमर्पण है खुद का खुद के लिए | जिस मंज़िल को हम पाना चाहते है उसकी राह में लय होना पड़ता है निरंतर उसके लिए प्रयास करना होता है | कभी आप किसी सफल इंसान से मिलिए जिसने जीवन में सफलता प्राप्त कर ली हो वो आपको बतायंगे उन्होंने कैसी परिस्थितियों का सामना किया तब मंज़िल तक पहुंचे परन्तु उनकी उनके काम के प्रति तत्परता तथा समर्पण ही उनके सफल होने का कारण बनता है | खराब परिस्तिथिया सिर्फ हमे हमारी राह में आज़माती है और भी ज्यादा सफल होने के लिए हमे मज़बूत करती है | सकारत्मकता धैर्य एवं तत्परता ही हमारी सफलता के लिए साथी है जो हमे सफल होने का अवसर प्रदान करती है |

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वर्तमान धर्म की दशा

By SpiritualityNo Comments

बचपन से लेकर आजतक हमने कई धर्मो के बारे में सुना है अर्थात जाना है तथा भारत देश में कई प्रकार के धर्मो को जगह मिली है मुख्यतः चार धर्म हमे पता है मुस्लिम ,हिन्दू , सिक्किम और ईसाई धर्म | सभी अपने अपने धर्मो के प्रति कृतज्ञ होते है परन्तु हमारा ही धर्म सबसे बड़ा है ऐसा कहना कही न कही गलत है क्यूंकि ईश्वर सभी प्राणियों के लिए एक समान है ईश्वर का किसी प्राणी के लिए कोई भेदभाव नहीं है सब के लिए उसका एक समान अस्तित्व है वो किसी के लिए बड़ा या छोटा नहीं हो सकता , सभी प्राणियों में उसका वास है |

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धर्म तोह इंसानो की सुगठित रचना है या हम मान सकते है जीवन जीने की एक शैली है धर्म के आधार पर किसी को गलत या सही बताना बिलकुल भी उचित नहीं है सब अपने धर्म के हिसाब से अपना जीवन व्यतीत करते है इसमें कुछ गलत भी नहीं है | परन्तु वर्तमान में धर्म को तोला जाता है यह कृत्य निंदनीय है | अगर विचार किया जाए तो जीवन जीने के लिए किसी धर्म की कोई आवश्यकता नहीं है , प्राणी अगर स्वयं को जानकर एक दूसरे को जीवन जीने में मदद करे तोह इस संसार में किसी भगवान की आवश्यकता नहीं है संसार में सब एक सामान है | बड़ा छोटा , अमीर गरीब , उच जाती निच जाती इस प्रकार की तुलना व्यर्थ है | वर्तमान में तथा पहले भी इन भेदभावों के कारण बहुत से प्राणी समुदाय को क्षति पहुंची है , वर्तमान दौर की हम बात करे तो धर्मो का प्रचार अवश्य होता रहता है परन्तु सिर्फ अन्धविश्वास की नींव पर ‘ कोई भी वास्तविक धर्म से परिचित नहीं है सभी कहे सुनाये ज्ञान को फैलाते है जिससे कोई लाभ नहीं है इसलिए हमे इन धर्मो की आड़ नहीं लेकर मनुष्यता को नया जन्म देना चाहिए |

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आज में कहा हु ?

By Miracle MorningNo Comments

‘खो गया है आज कही कल की तलाश में’ हमारा आज हम भूल जाते है उसे याद नहीं रखना चाहते क्यूंकि हमारा आज इतना अच्छा नहीं है | हम हमेशा हमारे कल को अच्छा बनाने में लगे है आज पर हमारा कोई विचार ही नहीं है , व्यक्ति हमेशा भविष्य की कल्पना करता है या फिर गुज़री हुई घटनाओ के विचार करता है और मन को विचलित कर लेता है परन्तु वह कभी भी आज पर केंद्रित नहीं रह पता | हमे ये जान लेना बहुत आवश्यक है , की कल जो होगया ऐसी घटना अब कभी नहीं घटने वाली और जो भविष्य में अर्थात कल घटने वाला है उसका हमे कुछ पता नहीं है | सत्य वर्तमान में है आज इसी क्षण में है |

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जो कल अभी आया ही नहीं उसकी चिंता करना व्यर्थ है जो होना होता है होकर ही रहता है इसलिए हमे हमारे आज पर विचार करना बहुत आवश्यक है क्यूंकि हमारा आज बेहतर है अगर हम आज को बेहतरीन बना सकते है तोह कल हमारा बेहतर ही होगा| सकारत्मकता के साथ हमे हमारे आज पर विचार कर हमेशा उसे बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए | आज की गतिविधियों को देखे आज के दिन पर केंद्रित हो जाये , तब हम जानेंगे की सिर्फ आज ही हमारे लिए है | आज के प्रति समर्पित रहे तथा भविष्य की कल्पनाओ से अपने मन को विचलित नहीं करना चाहिए | आज बेहतर तोह कल भी अनिवार्य रूप से बेहतर ही होगा क्यूंकि वर्तमान में जिया हुआ जीवन ही सही जीवन कहलाता है |

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अशांत जीवन में शांति कैसे पाए

By Your BrainNo Comments

दैनिक गतिविधियों एवं कई परेशानियों ,व्विपदाओं का निरंतर समावेश हमारे जीवन का हिस्सा है , जिसके कारण हम दुःख एवं सुख की खोज करते है ऐसी कितनी ही आशाएँ एवं इच्छाएँ हमारे मन में रोज पनपती रहती है | हमारा मन रोज नई-नई आकांक्षाओ की पूर्ति करना चाहता है ऐसे में हमारा जीवन शांति को कैसे प्राप्त हो सकता है | शांति के लिए सर्वप्रथम हमे हमारे जीवन को गहरायी से समझ लेना बहुत जरुरी होता है , इंसान जीवन में मेहनत मशक़्क़त करता है नाम कमाता है , धन कमाता है, इछाओ की पूर्ति करता है परन्तु एक समय ऐसा भी आता है जब वह जीवन से ऊब जाता है या थक जाता है तथा अशांत हो जाता है | हमे मनुष्य जीवन परम शांति का अनुभव करने के लिए ही मिला है इसके लिए हमे ये जान लेना बहुत आवश्यक है की अनन्त ब्रह्माण्ड में इस पृथ्वी पर
जहा हमारा वास है ‘ हमारे इस संसार में किसी भी घटना के होने के पीछे कोई भी कारण नहीं है सब अपने आप में दिव्य एवं परम है | हमे इस बात पर भी गौर करना चाहिए की फिर हमारे जीवन में दुःख एवं अशांति होने का क्या कारण है तथा खोजने पर हम पायेँगे हमारा मन ही हमारी अशांति का कारण है|

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मन को समझ लेना बहुत आवश्यक है , मन हमारे शरीर का कोई अंग नहीं है परन्तु हमारे भीतर विचारो का निरंतर प्रवाह मन से ही होता है | मन हमारे शरीर के भीतर ऐसा चँचल है जैसे किसी गाँव में पागल कुत्ता होता है तथा चँचल मन के कारण ही हम अशांत हो जाते है तथा जीवन में अमूल्य शांति को प्राप्त नहीं कर पाते है | मन की शांति के लिए हमे दैनिक जीवन से कुछ समय निकाल कर मन की गतिविधियों को समझने के लिए निकालना चाहिए |
दिनभर में या रात को सोते हुए जब भी हम फ्री हो एकांत में बैठे हमारे गैजेट्स मोबाइल को बंद करके रख दे तथा मोन धारण करने की कोशिश करे जितना भी देर आप कर सकते है उतनी देर मोन को धारण करे किसी भी अवस्था में बैठकर या लेटकर भीड़ में हो तब भी कर सकते है | दिन में आपसे जितना हो सके उतनी बार मोन रहने की कोशिश करे एवं अपनी साँस के अंदर एवं बाहर होने पर ध्यान लगाए आपका मन धीरे धीरे विसर्जित होने लगेगा तथा आप अपने विचारो के आवागमन को समझ पाएंगे जिससे आप और गहरी शांति को अनुभव कर पाएंगे | ऐसा निरंतर करे इस प्रक्रिया को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना ले | आप हमेशा एक नयी एवं शुद्ध शांति को अनुभव करते जायेंगे और आपके जीवन में भी एक परम शांति की लहर चलना शुरू हो जायगी |

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प्रेम की परिभाषा नहीं

By Your BrainNo Comments

शरीर के भीतर एक अद्भुत तरंग उठती है , जब हम किसी शदाबहार ,खूबसूरत ,दार्शनिक दृश्य को देखते है किसी के प्रति करुणा दया से भर जाते है तथा किसी व्यक्ति विशेष को देख कर भीतर से भावपूर्ण तरंगे उठती है उस अहसास के लिए कोई शब्द नहीं है ना ही उसका कोई अर्थ निकल सकता है | परन्तु सम्बोधित करने हेतु ‘प्रेम’ शब्द उपयोग किया जाता है | प्रेम संसार में सभी प्राणियों के लिए महत्वपूर्ण है जीवन से लेकर मृत्यु तक के इस सफर में प्रेम ही हमारा सह-यात्री है |
जितना प्रेम हम करते है या जितना प्रेमपूर्ण हम होते है उससे कई गुना प्रेम हमारे लिए प्रकट होता है ” प्रेम अनन्त है ,जो कही से शुरू नहीं होता और न कही पर अंत | प्रेम निरंतर एवं शुद्ध पवित्र है | सभी के भीतर एवं बाहर प्रेम नित्य बहता है परन्तु अनावश्यक इच्छाओ एवं वासनाओ की दौड़ में हम उस अछूत प्रेम को नहीं जान पाते एवं उससे वंछित रहते है “प्रेम तोह परम आनंद है जीवन की भावपूर्ण घटना ही प्रेम है | चराचर जगत में सभी दिशाओ में प्रेम है तथा उस प्रेम को उपलब्ध होने के लिए हमे स्वयं प्रेमपूर्ण होना आवश्यक है प्रेमपूर्ण व्यक्ति परम शांति को प्राप्त कर फिर किसी की कोई आशा नहीं करता है |

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हम कई घटनाये सुनते है , किसी पुरुष ने स्री को प्रेम में धोका किया या फिर किसी स्री ने पुरष के प्रेम को ठुकराया | परन्तु यह बात अर्थपूर्ण नहीं मालूम पड़ती क्यूंकि जहा प्रेम है वहा धोखा कैसे हो सकता है और अगर धोखा दिया तोह फिर वो शतप्रतिशत प्रेम नहीं था | प्रेम में जो साथ हुआ फिर निरंतर प्रेम में ही रहेगा , धोखा प्रेम का पर्याय नहीं है |
प्रेम सभी के प्रति एक भाव में ही होता है माँ , पिता , बंधू ,मित्र , या प्रिय इसमें सब के प्रति एक भाव होता है प्रेम तुलनात्मक नहीं है प्रेम अतुल्य है | किसी से प्रेम की तुलना नहीं की जा सकती ; प्रेम परम आनंद अर्थात जीवन का परम अनुभव है | प्रेम स्वयं के अनुभव से ही जाना जा सकता है स्वयं की अनुभूति ही हमे सत्य प्रेम का दर्शन करवा सकती है

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क्रोध का मनोविज्ञान

By Your BrainNo Comments

‘क्रोध क्या है | क्रोध हमारे चित्त की एक उलझन भरी दशा है जिसमे मनुष्य बिना होशपूर्ण हुए ही गलत आचरण कर देता है तथा क्रोध के शांत होने पर पछतावा करता है की इतना नुक्सान होगया मेरी अन्तर्दशा का , मेरे द्वारा क्यों किया गया क्रोध , अशांत मन में ही क्रोध उतपन्न होता है यह बात जान लेना बहुत आवश्यक है | शांत चित्त वाला मनुष्य कभी क्रोध का अपने भीतर जन्म नहीं होने देता | नकारात्मकता ही क्रोध की जननी है इसलिए नकारत्मक विचारो एवं लोगो से दूरी बनाये रखना चाहिए क्यूंकि व्यर्थ विवाद करना उचित नहीं होता है |

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क्रोध करना आसान नहीं होता, क्रोध करने के लिए उसकी तैयारी आवश्यक होती है क्यूंकि जितना क्रोध हम सामने वाले इंसान पर करना चाहते है उतनी ही जटिलता हमारे भीतर उतपन्न करनी होती है हमारी अंतरात्मा को उतना ही दुखाना पड़ता है जितना सामने वाला हमारे क्रोध से दुःख पाता है | जितना दुखी हम सामने खड़े इंसान को करना चाहते है उतना ही द्वेष घृणा हमारे अंदर भी जन्म लेती है इसलिए क्रोध करना उचित नहीं कहा गया है क्यूंकि इससे हमारी क्षति है और ऐसे क्रोध करने से क्या फायदा है जिससे हम खुद नुकसान में रहे |
कई बार हम देखते है कोई व्यक्ति अपने आपे से बाहर हो जाता है और जो घटना वह नहीं करना चाहता वो भी कर देता है जिससे उसे बाद में दुःख और पछतावा होने लगता है | क्रोध तुमसे किसीने करने को नहीं कहा था परन्तु क्रोध किया गया, क्रोध एक अकस्मात् घटना की तरह है हमारे चित्त की मनोदशा का प्रभाव ही क्रोध का कारण बनता है | सकारात्मक विचारो वाला इंसान कभी क्रोध नहीं करता क्यूंकि उसकी मनोदशा नकारात्मक विचार वाले इंसान से सुलभ एवं शुद्ध है |

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हमने वो कहावत सुनी है की दुसरो पर कीचड़ उछालने के लिए पहले खुद के हाथ गंदे करने पड़ते है , इसी प्रकार दूसरे पर क्रोध करने के लिए हमे खुद जटिल एवं क्रोधी होना पड़ता है क्रोध किसी भी समस्या का हल नहीं हो सकता परन्तु समस्या को बढ़ाने में अवश्य मदद करता है | शांत चित्त वाला इंसान हमेशा अच्छे आचरण का धनी होता है तथा किसी भी कार्य में बाधा आने पर संयम से काम लेता है , परन्तु क्रोध करने वाला इंसान बनते काम बिगाड़ सकता है | क्रोध करना किसी किसी की बहुत बुरी आदत साबित होती है जिससे उससे कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है | शांत विचारो को अपनाये एवं सरल तथा सफल जीवन की कामना करे |
क्यूंकि इस छोटी सी जिंदगी में बेशुमार दौलत कमाई जा सकती है परन्तु दौलत से मन की शांति कभी नहीं कमाई जा सकती , शांति के लिए हमे ही प्रयास करना पड़ता है |

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आदत क्या हे

By Spirituality, Your BrainNo Comments

बहुत ही आम एवं सरल घटना है जीवन की ‘आदत हो जाना, परन्तु क्या हम जानते है आदत हम खुद बनाते है जाने-अनजाने हम उसमे इतना खो जाते है की छोड़ने से भी नहीं छोड़ी जाती | आदते कैसी भी हो सकती है अच्छी या बुरी | सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक हम हमारी आदतों में ही उलझे रहते है | अच्छी आदतें तोह हमारे जीवन में लाभकारी सिद्ध होती है जिससे हमारा जीवन सुगमता से चलता है परन्तु बुरी आदतें हमारे जीवन को बर्बादी की ओर ले जाती है इसलिए हमे हमारी आदतों का सही चुनाव करना बहुत आवश्यक है|

जिंदगी की शुरुवात से देखे , एक बच्चा जन्म लेता है थोड़ा बड़ा होता है, देखने लगता है, सुनने लगता है तब उसे सिखाया जाता है सामने खड़ी औरत जिसने उसे पोषण दिया वो माँ है | माँ को वो नहीं जानता परन्तु सीखने के बाद उसकी आदत का हिस्सा बन जाता है और वो माँ कहने लग जाता है इसी प्रकार जीवन नयी नयी आदतों में चलता रहता है | जन्म से लेकर मृत्यु तक मनुष्य हो या अन्य प्राणी अपनी आदतों के अनुसार ही अपना जीवन जीता है|हमने देखा है कुछ लोग मांसाहारी होते है और कुछ लोग शाकाहारी इसके पीछे भी उनकी आदत ही कारण है

 

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जिसने बचपन से शाकाहारी भोजन लिया है उसे उसकी आदत हो गयी है परन्तु एक दिन अगर आप अचानक उसके सामने माँस खाने के लिए दोगे तोह वो नहीं खा पायेगा क्यूंकि वह उसकी आदत से भिन्न है | हम यह जान रहे है आदत क्या है परन्तु हमे हमारी आदतों का सही चुनाव बहुत आवश्यक है |
तम्बाकू,सिगरेट,शराब, गांजा और भी नशीले पदार्थ जिनकी लत बहुत आसानी से लगती है और धीरे-धीरे आदत में बदल जाती है जीवन गलत दिशा में बढ़ने लगता है सूझ-बुझ खो जाती है | ऐसी आदतों से निरंतर दुरी बनाये और स्वस्थ रहे अगर आप इन आदतों से ग्रस्त हो चुके है तोह प्रयास करे इन्हे कम किया जाने का क्यूंकि बुरी आदत से आपका और आपके परिवार का नुकसान है |
गलत आदतों से बचने का उपाय भी साधारण है परन्तु धैर्य एवं विवेक से हम इनसे छुटकारा पा सकते है ,जाने कैसे हम इसके लिए प्रयास कर सकते है ” जब भी लत हमे घेर ले उस वक्त हमारी सांसो की गति बदल ले इससे हमारे मन में उठने वाले विचार जो की हमे हमारी आदतों की ओर आकर्षित करते है शांत हो जाते है ,निरंतर विचारो को शुद्ध करे सकारात्मकता लाये | प्रयास करे गलत आदतों की जगह पर अच्छी आदतें लाने का गलत विचार ही हमे गलत दिशा देते है इसलिए सकारात्मक विचारो को सोचे और जीवन को एक सफल दिशा में अग्रसर करे |